JEE (जेईई) का फुल फॉर्म क्या होता है?

JEE (जेईई): Joint Entrance Examination (जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन)

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JEE (जेईई) का फुल फॉर्म या मतलब Joint Entrance Examination (जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन) होता है।

JEE (जेईई) यानी ज्वाइंट एंटरेंस एग्जामिनेशन भारत के शीर्ष इंजीनियरिंग कॉलेजेस जैसे कि आईआईटी, एनआईटी, ट्रिपल आईटी और अन्य में एडमिशन के लिए एक जरूरी और सबसे बड़ा एंट्रेंस एग्जाम है।

 

JEE full form in Hindi
JEE full form in Hindi

 

ज्वाइंट एंटरेंस एग्जामिनेशन नेशनल लेवल का एंट्रेंस एग्जाम है, जिसमें हर साल 1000000 से ज्यादा स्टूडेंट भाग लेते हैं।

यह एंट्रेंस एग्जाम हर साल 2 बार ऑनलाइन मोड में कंडक्ट किया जाता है और इस एंट्रेंस एग्जाम के 2 पार्ट हैं।

जेईई मेन- जेईई मेन में क्वालीफाई करने के बाद ही आप आईआईटी ऐडमिशन के लिए जरूरी जेई एडवांस एग्जाम लिख पाएंगे।
वहीं अगर आप एनआईटी और ट्रिपल आईटी जैसे भारत के शीर्ष इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लेना चाहते हैं, तो आप जेईई मेन के स्कोर पर एडमिशन ले सकते हैं।

जेईई एडवांस– इंडिया के 23 आईआईटी यानी इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एडमिशन के लिए एंट्रेंस एग्जाम जरूरी है।।
जेईई एडवांस में सबसे अच्छा स्कोर करने वाले स्टूडेंट को ही आईआईटी में एडमिशन मिल पाता है।

JEE (जेईई) के लिए पात्रता

जो स्टूडेंट इंटर यानी ट्वेल्थ, साइंस और मैथ्स सब्जेक्ट के साथ पास कर चुके हैं, या अपीयर कर रहे हैं, वे जेईई के लिए एलिजिबल है।

छात्र की आयु जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम अप्पेअर होते समय, कम से कम 17 साल होनी चाहिए।

JEE (जेईई) की मुख्य विशेषताएं

  • जेईई हर साल 2 बार कंडक्ट किया जाता है, पहली बार जनवरी में और दूसरी बार अप्रैल में
  • जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन का पहला चरण जिसे जेईई मेन कहते हैं हर साल अप्रैल महीने के पहले सप्ताह में कंडक्ट होता है।
  • जेईई मेन एंट्रेंस एग्जाम में 2 पेपर होते हैं, पहला पेपर उन स्टूडेंट्स को अटेंड करना होता है, जो इंजीनियरिंग में एडमिशन लेना चाहते हैं, और दूसरा पेपर उन स्टूडेंट के लिए होता है, जो बीआर्क कोर्स में एडमिशन लेना चाहते हैं।
  • जेईई मेन में अच्छा स्कोर करने वाले टॉप 150000 स्टूडेंट्स को जेईई एडवांस लिखने का मौका मिलता है।
  • जेईई मेंस की रैंकिंग तैयार करने में क्लास ट्वेल्थ का स्कोर कंसीडर नहीं किया जाता है, वही जेईई एडवांस की रैंकिंग में स्टूडेंट के ट्वेल्थ स्कोर का महत्व होता है।
  • कोई स्टूडेंट जेईई मेन का एग्जाम लगातार तीन साल लिख सकता है वही जेईई एडवांस का केवल 2 साल लिख सकता है।
  • अगर कोई स्टूडेंट एक ही साल में होने वाले दो जेईई मेन या जेई एडवांस के एग्जाम में अप्पेअर होता है, तो उसका यह दोनों अटेंप्ट 1 साल के अंदर ही होगा, और इसे एक अटेम्प्ट के रूप में ही कंसीडर किया जाएगा।
  • जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन में मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन पूछे जाते हैं, और इस एग्जाम में नेगेटिव मार्किंग स्कीम भी होता है।
  • जेईई की पूरी प्रक्रिया जैसे कि एप्लीकेशन, एग्जामिनेशन, रिजल्ट और काउंसलिंग, सब कुछ ऑनलाइन होता है।
  • इंडिया के बहुत सारे टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज में जेईई मेन के स्कोर पर एडमिशन मिल सकता है।

जेईई एफएक्यू

NEET और JEE में क्या अंतर है?

नीट यानी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस एग्जाम, भारत में मेडिकल कोर्सेज जैसे कि एमबीबीएस ,बीडीएस, बीएचएमएस आदि में एडमिशन के लिए एक जरूरी एंट्रेंस एग्जाम है।

जबकि जेईई यानी जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन भारत में टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजेस जैसे कि आईआईटी, एनआईटी, ट्रिपल आईटी आदि में एडमिशन के लिए कंपलसरी एंट्रेंस एग्जाम है।

जेईई परीक्षा का उपयोग क्या है?

अगर कोई स्टूडेंट भारत के किसी टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग करने की ख्वाहिश रखता है, तो उसे जेईई यानी जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन जरूर लिखना चाहिए।
इस एंट्रेंस एग्जाम के दो पार्ट्स जेईई मेन और जेई एडवांस के स्कोर के आधार पर, अलग-अलग टॉप के कॉलेज जैसे कि आईआईटी, एनआईटी, ट्रिपल आईटी और अन्य इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन मिलता है।

IIT NEET क्या है?

JEE Advanced प्रवेश परीक्षा को JEE NEET भी कहा जाता है।
जैसे मेडिकल प्रवेश के लिए नीट प्रवेश परीक्षा अनिवार्य है, वैसे ही जेईई एडवांस आईआईटी प्रवेश के लिए अनिवार्य है।
कुछ लोग JEE Advanced को JEE NEET भी कहते हैं।

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